रणनीतिक भंडार
✍️पूरी दुनिया में सरकारें और निजी कंपनियां मिल कर कच्चे तेल का एक भंडार अपने पास रखती हैं।
इस भंडार को ऊर्जा संकट या तेल की सप्लाई में अल्पकालिक गड़बड़ी से निपटने के लिए रखा जाता है।
✍️अमेरिका, चीन, जापान, भारत, यूके समेत दुनिया भर के कई देश ऐसा भंडार रखते हैं।
✍️1973 के तेल संकट के बाद भविष्य में इस तरह के संकटों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) नाम की एक संस्था की स्थापना की गई थी।
इसके 30 सदस्य हैं और आठ सहयोगी सदस्य।
सभी सदस्य देशों के लिए कम से कम 90 दिनों का तेल का भंडार रखना अनिवार्य है।
भारत आईईए का सहयोगी सदस्य है।
✍️तेल मंत्रालय के तहत आने वाली कंपनी आईएसपीआरएल भारत में तेल के रणनीतिक भंडार का प्रबंधन करती है।
✍️एक रिपोर्ट के मुताबिक आईएसपीआरएल के पास आपात इस्तेमाल के लिए करीब 3.7 करोड़ बैरल कच्चे तेल का भंडार है।
✍️भारत में वर्तमान तीन सामरिक और रणनीतिक भंडार(5.33 MMT) है—
1. विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) (1.33 MMT)
2. मंगलौर (कर्नाटक) (1.5 MMT)
3. पाडुर (कर्नाटक) (2.5 MMT)
इतना तेल कम से कम नौ दिनों तक भारत की खपत की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है।
✍️ओडिशा के चंदीखोल (ओडिशा) (4.5MMT) और पादुर (कर्नाटक) (2.5 MMT) में दो अतिरिक्त सुविधाएँ स्थापित करने की घोषणा की थी।
✍️राजस्थान के बीकानेर में भी एक और टैंक बनाने की घोषणा हो चुकी है।
✍️इस रणनीतिक भंडार के अलावा तेल कंपनियां कम से कम 65 दिनों का कच्चे तेल का भंडार अपने पास रखती हैं।
✍️SPR कार्यक्रम के दूसरे चरण के पूरा होने के बाद भारत में कुल 87 दिनों तक (रणनीतिक भंडार द्वारा 22 + भारतीय रिफाइनर द्वारा 65) तक खपत के लिये तेल उपलब्ध कराया जाएगा।
यह मात्रा IEA द्वारा 90 दिनों के लिये तेल उपलब्ध कराने के शासनादेश के काफी निकट होगा।
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