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विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP)

✍️WPF के बारे में-
  • इटली की राजधानी रोम में स्थित विश्व खाद्य कार्यक्रम दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संगठन है, जो भूख के खिलाफ जंग लड़ता है और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
  • WFP खाद्य के अंतिम लक्ष्य के साथ भूख और कुपोषण को खत्म करने का प्रयास करता है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह का सदस्य है और इसकी कार्यकारी समिति का हिस्सा है।
  • 19 दिसंबर1961 में स्थापित, WFP दुनिया के एक दृष्टिकोण का अनुसरण करता है जिसमें हर आदमी, महिला और बच्चे की सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक भोजन तक हर समय पहुंच होती है।
  • WFP एक कार्यकारी बोर्ड द्वारा शासित होता है , जिसमें 36 सदस्य देश शामिल होते हैं।
  • इसकी अध्यक्षता एक कार्यकारी निदेशक द्वारा की जाती है, जिसकी नियुक्ति संयुक्त राष्ट्र महासचिव और संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन के महानिदेशक द्वारा की जाती है। कार्यकारी निदेशक को पाँच वर्ष के कार्यकाल के लिये नियुक्त किया जाता है। 
  • विश्व सरकार, निगमों और निजी दाताओं से स्वैच्छिक दान द्वारा WFP कार्य वित्त पोषित है।
  • WFP खाद्य सहायता को सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से लड़ने, बाल मृत्यु दर को कम करने, मातृ स्वास्थ्य में सुधार और एचआईवी और एड्स सहित बीमारी से लड़ने के लिए भी निर्देशित किया जाता है।
  • विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली
  • इसके 17000 कर्मचारी दुनिया भर में फैले हुए हैं।
  • कर्मचारियों के वेतन का भुगतान व संस्था का संचालन स्वैच्छिक योगदान के जरिए होता है।
  • यह फूड एवं एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) व इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट (IFAD) के साथ मिलकर काम करता है।
  • इसकी वेबसाइट के अनुसार इनके परिवहन बेड़े में 5600 ट्रक, 30 जहाज, लगभग 100 विमान शामिल है, जिसके जरिए यह दुनिया के किसी भी कोने में जरूरतमंद को खाद्यान्न आपूर्ति की सुनिश्चित प्रदान करता है।
  • यह हर साल 15 अरब पैकेट राशन का वितरण करता है, प्रति पैकेट ₹45 का खर्च आता है।


✍️WFP के उद्देश्य:

  1. जान बचाना और आपात स्थितियों में आजीविका की रक्षा करना।
  2. खाद्य सुरक्षा और पोषण का समर्थन करना और और निम्नलिखित आपात स्थितियों में आजीविका का निर्माण करना।
  3. जोखिम कम करना और लोगों, समुदायों और देशों को अपने स्वयं के भोजन और पोषण की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाना।
  4. अल्पपोषण को कम करना और भूख के अंतर-उत्पत्ति चक्र (inter-generational cycle) को तोडना।
  5. 2030 में जीरो हंगर (Zero Hunger)।
✍️विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्य: 
  • इसकी स्थापना के कुछ ही माह बाद वर्ष 1962 में उत्तरी ईरान के बोईन ज़हरा शहर में आए भूकंप के दौरान WFP द्वारा बड़ी मात्रा में गेहूँ, चीनी आदि उपलब्ध कराया गया। 
  • इसके बाद WFP ने थाईलैंड और अल्जीरिया में खाद्य सहायता प्रदान करने में  महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • वर्ष 1963 में WFP द्वारा पहले विकास कार्यक्रम  (सूडान में न्युबियन समुदाय के लिये) की शुरुआत की गई और इसी वर्ष  WFP की पहली स्कूली भोजन परियोजना (टोगो गणराज्य में) को मंज़ूरी दी गई।
  • वर्ष 2019 में WFP द्वारा  विश्व के 88 देशों में 97 मिलियन लोगों को सहायता उपलब्ध कराई गई।
  • वर्ष 2019 के दौरान WFP ने लगभग 4.4 टन खाद्य सामग्री का वितरण किया और 91 देशों से 1.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के खाद्य पदार्थों की खरीद की। 
  • 2019 में इस संगठन ने 88 देशों में लगभग 9 करोड़ 70 लाख लोगों की मदद की थी।
✍️खाद्य सुरक्षा में WFP की भूमिका
2030 तक  सतत् विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals-SDG) के तहत विश्व भर से भुखमरी की समस्या को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम का दो-तिहाई काम संघर्ष प्रभावित देशों में है जहाँ की आबादी के, बिना संघर्ष वाले देशों की आबादी की तुलना में, कुपोषण की चपेट में आने की तीन गुना ज़्यादा सम्भावना है।

WFP के अनुसार, विश्व भर में 690 मिलियन लोगों को  भोजन की कमी का सामना करना पड़ता है और इनमें से 60% लोग संघर्ष प्रभावित देशों में रहते हैं।

 इस कार्य हेतु WFP संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिक एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

✍️विश्व भुखमरी मानचित्र (World Hunger Map)-

अलीबाबा क्लाउड, अलीबाबा का क्लाउड कंप्यूटिंग हैण्ड डिजिटल “वर्ल्ड हंगर मैप” विकसित करने के लिए WFP के साथ काम करेगा। मानचित्र 2030 तक वैश्विक भूख और परिचालनों की निगरानी करने में मदद करेगा जो संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सतत विकास लक्ष्यों में से एक है। इसका उद्देश्य हस्तक्षेपों की दक्षता को बढ़ावा देना और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को कम करना है।



✍️भारत के संदर्भ:

भारत में खाद्य और पोषण सुरक्षा के प्रति UNWFP के साथ 50 साल की साझेदारी के लिए कॉफी टेबल बुक (Coffee Table Book) लॉन्च की गई है।

कॉफी टेबल बुक (यूएनडब्ल्यूएफपी के साथ) के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें

यह पुस्तक भारत सरकार द्वारा देश को भूख और कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए और इस प्रयास में WFP की भूमिका के लिए महत्वपूर्ण प्रयास को दर्शाती है।

भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में WFP की भूमिका:

  • भारत में WFP  वर्ष 1963 से कार्य कर रहा है। भारत की लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Targeted Public Distribution System) में सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा यह लोगों तक भोजन की  पहुँच में सुधार के लिये नीतिगत इनपुट, तकनीकी सहायता आदि प्रदान करता है। 
  • WFP द्वारा TPDS के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ‘स्वचालित अन्न वितरण मशीन’ (अन्नपूर्ति) और ‘मोबाइल स्टोरेज यूनिट’ (Mobile Storage Units-MSU) जैसी कुछ पहलों का प्रस्ताव किया गया है।
    • अन्नपूर्ति, लाभार्थियों को किसी भी समय अपने खाद्यान्न कोटे से सटीक मात्रा में अनाज प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करती है। यह दो खाद्यान्नों को 25 किलोग्राम प्रति 1.3 मिनट की गति से वितरित कर सकती है। इसकी भंडारण क्षमता 200 किलोग्राम से 500 किलोग्राम है।
    • इसके तहत देश के पाँच राज्यों - उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में स्वचालित अनाज वितरण मशीनों की स्थापना की जाएगी।
    • मोबाइल स्टोरेज यूनिट (MSU), खाद्यान्न भंडारण के लिये एक किफायती उपाय है। इसका संचालन ओडिशा और उत्तराखंड में एक पायलट योजना के तहत किया जा रहा है। 
  • WFP के अनुसार, दिसंबर 2018 से  4,145 टन ‘फोर्टिफाइड चावल' का उत्पादन किया गया है और इसे वाराणसी में एक पायलट योजना के तहत 3 लाख स्कूली बच्चों में वितरित किया गया ।
भारत सरकार के प्रयास

✍️COVID-19 और WFP:

  • नोबेल समिति के अनुसार, COVID-19 महामारी के कारण दुनिया में भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। 
  • यमन, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान और बुर्किना फासो आदि देशों में हिंसक संघर्ष और COVID-19 महामारी के संयोजन से भुखमरी के कगार पर पहुँचने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा जुलाई 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, COVID-19 से होने वाली वैश्विक मंदी के कारण 83 से 132 मिलियन लोगों के सामने भुखमरी का संकट उत्पन्न हो सकता है।
  • COVID-19 महामारी के दौरान WFP की भारतीय इकाई द्वारा उत्तर प्रदेश के 18 ज़िलों में पूरक पोषण उत्पादन इकाइयों की स्थापना में तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिये उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए हैं।
    • इस समझौते के तहत WFP द्वारा आँगनवाड़ी योजना  के लगभग 33 लाख लाभार्थियों को गुणवत्ता वाले भोजन की आपूर्ति के लिये पूरक पोषण उत्पादन इकाइयों की स्थापना में तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
  • COVID-19 के दौरान  स्वचालित अन्न वितरण मशीन का प्रयोग और अधिक प्रासंगिक हुआ है क्योंकि इसके माध्यम से लाभार्थी अपने चुने हुए समय पर निर्धारित अनाज प्राप्त कर सकते हैं, इसके माध्यम से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने में आसानी होती है।

✍️चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र के ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ (World Food Programme-WFP) को वर्ष 2020 के नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) से सम्मानित किया गया है।

  • विश्व खाद्य कार्यक्रम’ (WFP) को यह सम्मान ‘भूख से लड़ने, संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति के लिये स्थितियों को बेहतर बनाने में योगदान देने और युद्ध व संघर्ष में भूख को एक हथियार के रूप में प्रयोग किये जाने से रोकने के प्रयासों में एक प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करने के लिये’ प्रदान किया गया है।
  • इस वर्ष नोबेल  शांति पुरस्कार के लिये WFP के चयन के माध्यम से नोबेल समिति ने विश्व के उन लाखों लोगों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है, जो भुखमरी से पीड़ित हैं या इसके खतरे का सामना कर रहे हैं।   
  • वर्ष 1901 में नोबेल शांति पुरस्कार की स्थापना के बाद से WFP 28वाँ संगठन है जिसे यह सम्मान दिया गया है। 
  •  यह 12वाँ मौका है जब संयुक्त राष्ट्र/इसकी किसी एजेंसी या इससे जुड़े किसी व्यक्ति को नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। 

✍️चुनौतियाँ:

  •  वर्ष 2030 तक भुखमरी को समाप्त करने के संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करना बहुत ही कठिन होगा।
  • शांति और स्थिरता वाले देशों में रहने वाले लोगों की तुलना में संघर्ष के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कुपोषित होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।
  • उदाहरण के लिये वर्ष 2015 में यमन में सऊदी अरब के नेतृत्त्व वाली सेना और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच शुरू हुए संघर्ष के कारण हज़ारों लोगों की मौत हो गई है। इस संघर्ष ने तीस लाख लोगों को विस्थापित किया है और देश को अकाल की ओर धकेल दिया। 

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