सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आसियान-भारत शिखर सम्मेलन

आसियान-भारत शिखर सम्मेलन

✍️1990 के दशक की शुरुआत में भारत द्वारा प्रारंभ 'लुक ईस्ट पॉलिसी’ से

✍️वास्तविक शुरुआत वर्ष 1992 में भारत को आसियान का पूर्ण क्षेत्रीय वार्ता साझेदार (look East full dialogue partner) का दर्जा दिया गया।  

क्षेत्रीय वार्ता का भागीदार या साझेदार का अर्थ है- भारत को कुछ समिति क्षेत्र में सहयोग का अवसर दिया जाए।

✍️1996 में भारत को अनुबंगी संगठन (Asian regional form) की सदस्यता दी गई।

✍️भारत एवं आसियान के देशों के संबंध 3C पर आधारित हैं- 

1. Commerce (व्यापार)

2. Culture (संस्कृति)

3. Connectivity (संपर्क)

सबसे पहले आसियान के साथ यह सहयोग सांस्कृतिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों तक सीमित था।

1994 में  विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी को जोड़ दिया गया।

✍️  भारत - आसियान शिखर सम्मेलन की शुरुआत

👉2002 में कंबोडिया के नामपेन्द्र में आसियान भारत सम्मेलन हुआ, जिसके बाद यह सिकरवार का वर्षिक आधार पर होने लगी।

👉भारत ने 8 अक्टूबर 2003 को इंडोनेशिया के बाली द्वीप में होने वाले वित्तीय आसियान भारत शिखर सम्मेलन में दक्षिण पूर्व एशिया में मित्रता तथा सहयोग की संधि को स्वीकार किया। आसियान और भारत में अंतरराष्ट्रीय आंतकवाद के खिलाफ सहयोग के लिए एक संयुक्त घोषणा पत्र पर भी हस्ताक्षर किया।

👉2010 में हनोई के आठवें आसियान भारत शिखर सम्मेलन में 2010 से 2015 तक के लिए एक नई कार्य योजना स्वीकार की गई।

👉12 नवंबर 2014 को नई पाटा म्यांमार में आयोजित किए गए बार में आसियान भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और आशा नेताओं ने भारत आसियान रणनीतिक भागीदारी की समीक्षा की, जिसमें आसियान को भारत की पूर्व के कार्य नीति का मुख्य बिंदु बना दिया गया तथा सभी क्षेत्रों में संबंधों को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया। इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी अब एक्ट ईस्ट पॉलिसी हो गई है।


👉2014-15 में दोनों देशों के बीच 76.52 billion-dollar का व्यापार हुआ।

👉2016-17 में दोनों देशों के बीच 71 billion-dollar का व्यापार हुआ, जो पूरे विश्व के कुल व्यापार का 10.85% था।

👉आसियान वर्तमान में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

👉आशियाना भारत वार्ता भागीदारी की 25 वीं वर्षगांठ का विषय- सझे मूल्य समान भाग्य (shared values, common destiny) है। यह 25 जनवरी 2018 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें सभी आसियान देशों को आमंत्रित किया गया।

👉भारत और आसियान संबंधों का विदेशी, भू राजनीतिक एवं सामरिक महत्व है।

👉दक्षिण चीन सागर में नौ सचालन की स्वतंत्रता बनाए रखने, नशीले पदार्थों की तस्करी, आंतकवाद, साइबर अपराध की रोकथाम तथा चीन की आक्रामक नीति को संतुलित करने के लिए भारत के लिए अत्यंत एक महत्वपूर्ण संगठन है।

👉2012 से शुरू क्षेत्रीय समग्र समझौते (R-CEP) से November 2019 को भारत द्वारा से अलग होने के फैसले के बाद आसियान देशों के साथ रिश्तो में कुछ सुस्ती आई।

👉17 वें भारत आसियान शिखर सम्मेलन 2020 में 2021-2025 के लिए नई आसियान-भारत कार्य योजना को अपनाया गया।


✍️18 वां आसियान-भारत शिखर

28 अक्टूबर 2021 को 18 वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रूनेई के सुल्तान हाजी हसनल बोलकिया के साथ संयुक्त रुप से बैठक की अध्यक्षता की। 

वर्ष 2022 को भारत आसियान फ्रेंडशिप वर्ष के तौर पर मनाने का फैसला किया गया है।

भारत ने म्यांमार के लिए $2लाख की मानवीय मदद की तथा आसियान को कोविड-19 के लिए 10 लाख डॉलर की मदद दी थी।

दोनों पक्षों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करने के विकल्पों पर विचार हुआ लेकिन किसी नई ठोस योजना के बारे में घोषणा नहीं हुई।

पीएम मोदी ने आसियान कल्चरल हेरिटेज लिस्ट को भी बढ़ाने का ऐलान किया।









टिप्पणियाँ