भारत मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कारिडोर(IMEC)
दूसरे देशों में रेल, सड़क व बंदरगाह बना कर उन पर अधिपत्य जमाने की चीन की रणनीति का जवाब भारत और अमेरिका ने खोज निकाला है। जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी व अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने मित्र राष्ट्रों के साथ मिल कर भारत मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कारिडोर स्थापित करने की घोषणा की है। इस कारीडोर में रेल लाइनों, सड़कों व बंदरगाहों का नेटवर्क होगा, स्वच्छ ईंधन के निर्यात की व्यवस्था भी होगी, सुरक्षित संचार व्यवस्था के लिए समुद्री केबल का नेटवर्क भी होगा और इस समूचे क्षेत्र को एक-दूसरे से जोड़ने वाली ग्रिड व्यवस्था भी होगी। पीएम मोदी ने कहा कि यह कारीडोर गरीब व विकासशील देशों की प्रगति तेज करेगा लेकिन इसमें सभी देशों की संप्रभुता व अखंडता का ख्याल रखा जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने इसे ऐतिहासिक बताया है।
9 सितंबर 2023 को पीएम मोदी व राष्ट्रपति बाइडन की सह-अध्यक्षता में एक कार्यक्रम हुआ जिसमें वैश्विक ढांचागत व निवेश के लिए साझेदारी (पीजीआइआइ) व भारत मध्यपूर्व यूरोप आर्थिक कारीडोर (आइएमईसी) की घोषणा की गई।
कार्यक्रम में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की पीएम जार्जिया मेलोनी, जर्मनी के चासंलर ओलाफ शोल्ज और ईयू की प्रेसिडेंट उर्सुला लेयेन भी मौजूद रहीं। ये सारे देश आइएमइसी के साझेदार होंगे।
चीन ने जिस तरह से एशिया से लेकर अफ्रीका तक और यूरोप तक सड़कों व रेल नेटवर्क तैयार करने का खाका तैयार किया है उसको लेकर कई विकासशील व गरीब देश आकर्षित हैं। चीन भारत के पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश समेत दूसरे पड़ोसी देशों को भी इस नेटवर्क से जोड़ रहा है। अब इसका सही विकल्प भारत व अमेरिका पेश करने को तैयार हैं। नई दिल्ली में इस परियोजना की घोषणा की भी खास अहमियत है। यह बताता है कि चीन के आक्रामक रवैये के विरुद्ध भारत और अमेरिका का गठबंधन कई स्तरों पर काम कर रहा है। सऊदी अरब और यूएई के इसमें शामिल होने को खाड़ी क्षेत्र में तनाव दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, 'हम आज ऐतिहासिक घोषणा के करीब पहुँच गए हैं। भविष्य में यह भारतीय इकोनमी को यूरोप व पश्चिम एशिया के देशों की इकोनमी से जोड़ने वाला अहम माध्यम बनेगा। यह विश्व के समक्ष कनेक्टिवटी व सतत विकास का उदहरण पेश करेगा। भारत कनेक्टिविटी परियोजनाओं को सिर्फ अपनी सीमा तक सीमित नहीं रखना चाहता। इस परियोजना में दूसरे देशों की संप्रभुता का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उधर, अमेरिका ने कहा कि परियोजना के जरिये भारत इजरायल, यूएई, जार्डन, यूरोप के बीच कारोबार आसान हो जाएगा।
[ स्रोत:- दैनिक जागरण ]
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