पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS)
✍️ एक विशिष्ट मंच है जिसका गठन क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और समृद्धि के उद्देश्य से किया गया था।
✍️ पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) को आम क्षेत्रीय विषयों, राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर सामरिक वार्ता तथा सहयोग के लिये एक मंच के रूप में विकसित किया गया है जो क्षेत्रीय निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
✍️ इस संबंध में ईस्ट एशिया ग्रुपिंग (East Asia Grouping) की अवधारणा पहली बार वर्ष 1991 में मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत की थी परंतु पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) इसकी स्थापना वर्ष 2005 में की गई।
✍️ 2005 में अपनी स्थापना के बाद से, इसने पूर्वी एशिया के रणनीतिक और भू-राजनीतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
✍️ 18 देश(10 आसियान + 8 सम्यवाद देश) सदस्य के तौर पर भाग लेते हैं।
10 आसियान सदस्य देशों(इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, ब्रूनेई, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, सिंगापुर, वियतनाम व लाओस) के अलावा, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, जापान, कोरिया गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस शामिल हैं।
✍️ भारत, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन का संस्थापक सदस्य होने के नाते, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को मजबूत करने और समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
✍️ यह आसियान आउटलुक ऑन इंडो पैसिफिक (एओआईपी) और इंडो-पैसिफिक ओशन इनीशिएटिव (आईपीओआई) के जुड़ने से संबंधित भारत-प्रशांत में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
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