विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (2021)
- 20 अप्रैल, 2021 को जारी
- 2002 से प्रत्येक वर्ष पेरिस(फ्रांस) स्थित अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता के गैर-लाभकारी संगठन रिपोर्टर्स सेन्स फ्रंटियर्स (RSF) या रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा जारी किया जाता है, जो सार्वजनिक हित में संयुक्त राष्ट्र, यूनेस्को, यूरोपीय परिषद, फ्रैंकोफोनी के अंतर्राष्ट्रीय संगठन (OIF—54 फ्रेंच भाषी राष्ट्रों का समूह ) और मानव अधिकारों पर अफ्रीकी आयोग के साथ सलाहकार की भूमिका निभाता है।
- पत्रकारों के लिये उपलब्ध स्वतंत्रता के स्तर के अनुसार 180 देशों को रैंक प्रदान करता है।
आकलन के आधार:- बहुलवाद के स्तर, मीडिया की स्वतंत्रता, मीडिया के लिये वातावरण और स्वयं-सेंसरशिप, कानूनी ढाँचे, पारदर्शिता के साथ-साथ समाचारों और सूचनाओं के लिये मौज़ूद बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता के पर तैयार किया जाता है।
वैश्विक परिदृश्य:-
- पत्रकारिता सूची में शामिल लगभग 73% देश स्वतंत्र मीडिया से पूरी तरह से या आंशिक रूप से अवरुद्ध है।
- सूचकांक 180 देशों में से केवल 12 (7%) में पत्रकारिता के लिये अनुकूल वातावरण प्रदान करने का दावा कर सकता है।
- राष्ट्रों द्वारा कोविड-19 महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिये सूचना तंत्र का उपयोग पूर्ण रूप से किया गया।
- रिपोर्ट में मुख्य रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बारे में चिंता व्यक्त की गई है क्योंकि प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के प्रयास में कई राष्ट्रों ने 'राजद्रोह,' 'राष्ट्र की गोपनीयता' और 'राष्ट्रीय सुरक्षा' पर कठोर कानून बनाए हैं।
रैंकिंग:-
- 1st- नॉर्वे (Norway)[लगातार 5 वर्षों से]
- 2nd- फिनलैंड (Finland)
- 3rd- स्वीडन (Sweden)
इरीट्रिया, सूचकांक में सबसे निचले स्थान (180) पर है, इसके बाद चीन 177वें, और उत्तरी कोरिया 179वें और तुर्कमेनिस्तान 178वें स्थान पर है।

भारत के प्रदर्शन का विश्लेषण:-
180 देशों की सूची में भारत 142वें स्थान पर रहा है। भारत को ब्राजील, मैक्सिको और रूस के साथ ‘खराब’ श्रेणी में रखा गया है।
भारत का अपने पड़ोसी देशों की तुलना में खराब प्रदर्शन रहा है। इस सूचकांक में नेपाल को 106वाँ, श्रीलंका को 127वाँ और भूटान को 65वाँ स्थान प्राप्त है, जबकि पाकिस्तान (145वें स्थान) भारत के करीब है।
भारत पत्रकारिता के लिये ‘खराब’ वर्गीकृत देशों में से है और पत्रकारों के लिये सबसे खतरनाक देशों में से एक के रूप में जाना जाता है, जो अपने काम को ठीक से करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट ने चर्चित पत्रकारों के लिये राष्ट्रवादी सरकार द्वारा बनाए गए भययुक्त वातावरण को ज़िम्मेदार ठहराया है, जो अक्सर उन्हें राज्य विरोधी या राष्ट्र विरोधी करार देता है।
कश्मीर की स्थिति चिंताजनक है, जहाँ पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों द्वारा पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाएँ सामने आई हैं।
भारत के खराब प्रदर्शन के पीछे कारण:-
- पत्रकारों को इस तरह के हमले की पहचान कराता है, जिसमें पत्रकारों के विरुद्ध पुलिस हिंसा राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा घात और आपराधिक समूहों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा उकसाए गए विद्रोह शामिल हैं।
- पत्रकारों को अक्सर सामाजिक नेटवर्क पर स्थापित समन्वित घृणा अभियानों के अधीन किया गया है।
- महिला पत्रकार की स्थिति में इस प्रकार के अभियान और अधिक गंभीर हो जाते हैं।
[नोट:—3 मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ (WPFD) मनाया जाता है।
यह दिवस ‘ संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन’ (UNESCO) द्वारा आयोजित किया जाता है।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस2021 की थीम:- ‘इनफाॅॅर्मेशन एज़ ए पब्लिक गुड’ । ]









टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Welcome on my blog ...tnx for reading