✍️ मौद्रिक नीति समीक्षा एक नजर में- वर्ष की पहली छमाही ( अप्रैल सितंबर , 2020 ) बीत जाने के बाद आरबीआइ ने सालाना विकास दर को लेकर स्थिति स्पष्ट की है । मौद्रिक नीति क्या होती है? रेपो रेट- वह दर जिस पर बैंक अल्पकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए आरबीआई से ऋण लेते हैं। इसका प्रभाव- यदि यह सस्ती होती है तो बैंकों के लिए होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन जैसे कुदरा कर्ज की दर को कम करने में सहूलियत होती है। लॉकडाउन की वजह से अप्रैल - जून , 2020 की तिमाही में भारतीय इकोनॉमी में 23.9 फीसद की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है । विश्व बैंक ने एक दिन पहले ही भारतीय इकोनॉमी में चालू वित्त वर्ष में 9.6 फीसद की गिरावट और उसके बाद वर्ष 2021-22 में 5.4 प्रतिशत तथा वर्ष2022-23 में 5.2 प्रतिशत की तेजी आने का अनुमान लगाया है । भारतीय रिजर्व बैंक ने 2021-22 के लिए महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है । केंद्र और राज्य के संयुक्त राजकोषीय घाटे का स्तर चालू वित्त वर्ष में 12 प्रतिशत ( जीडीपी के सापेक्ष ) और अगले वित्त वर्ष के दौरान नौ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है । ...
From national dainik jagran